गर्भवती महिला के लिए क्या क्या खाना चाहिए?HealthPlanet

Posted on Mon 6th Feb 2023 : 09:29

स्वस्थ गर्भावस्था के लिए आहार-

आपके रोजमर्रा के आहार में प्रतिदिन निम्नांकित भोजन समूहो में से अलग-अलग भोजन शामिल होने चाहिए:

अनाज, साबुत व पूर्ण अनाज, दाल और मेवे: हर भोजन में इनका एक हिस्सा रखें। जटिल कार्बोहाइड्रेट्स जैसे कि ब्राउन राइस, साबुत अनाज, किनोआ, जई (ओट्स), ज्वार, बाजरा, सूजी और होलग्रेन ब्रेड और पास्ता आदि का सेवन करें। इनसे आपको और शिशु को न केवल ज्यादा पोषक तत्व मिलेंगे, बल्कि इनसे आपका पेट ज्यादा समय तक भरा-भरा रहेगा। साथ ही स्टार्चयुक्त जड़ वाली सब्जियां जैसे कि आलू, जिमिकंद, शकरकंदी, अरबी या कच्चा केला आदि भी खाएं।

​फल और सब्जियां। कोशिश करें कि आप हर दिन कम से कम पांच हिस्से ताजा फल और सब्जियां खाएं। ​फल से ज्यादा सब्जियां खाने पर जोर दें। अलग-अलग रंगों वाले विभिन्न फल और सब्जियां शामिल करें, जिससे आपका पोषण बढ़ेगा। जूस और स्मूदी भी फायदा करती हैं। मगर, प्राकृतिक शर्करा आपके ब्लड शुगर के स्तर को प्रभावित कर सकती है और आपके दांत भी खराब हो सकते हैं। इसलिए बेहतर है कि इन पेयों की मात्रा सीमित रखें।

प्रोटीन से भरपूर भोजन। इनमें कम वसा का मांस और चिकन, मछली, अंडे और दाल-दलहन शामिल हैं। कोशिश करें कि एक हफ्ते में दो या इससे ज्यादा हिस्से मछली खाएं। इसमें कम से कम एक और ज्यादा से ज्यादा दो हिस्सा तैलीय मछली जैसे कि बांगड़ा या सार्डिन मछली होनी चाहिए।

डेयरी उत्पाद। इनमें शामिल है दही, छाछ और पनीर। ये भोजन कैल्शियम, प्रोटीन और विटामिन बी12 से भरपूर होते हैं। इनके ऐसे विकल्प जिनमे वसा और मीठा कम हो, वे ज्यादा स्वस्थ रहते हैं। यदि आपको लैक्टॉस असहिष्णुता है, तो अपनी डॉक्टर से बात करें कि आपको क्या खाना चाहिए।

वसा भी स्वस्थ आहार का जरुरी हिस्सा होती है, मगर कुछ वसा आपके लिए दूसरों की तुलना में ज्यादा बेहतर है। चाहे आप गर्भवती हो या नहीं, कोशिश करें कि आप स्वस्थ वसा (मोनोसैचुरेटेड और पॉलीसैचुरेटेड) ज्यादा लें। वहीं, दूसरी ओर अस्वस्थ वसा (सैचुरेटेड और ट्रांस) का सेवन कम करें।

बहुत से लोगों के आहार में आयोडीन का स्तर भी कम होता है। आयो​डीन भोजन में मिलने वाला ऐसा खनिज है जो शिशु के मस्तिष्क के विकास के लिए बहुत जरुरी है। डेयरी उत्पाद और समुद्री भोजन आयोडीन का अच्छा स्त्रोत हैं। यदि आप अपने भोजन में नमक डालती हैं, तो आयोडीन युक्त नमक इस्तेमाल करें।

पर्याप्त मात्रा में तरल का सेवन भी जरुरी है, ताकि आप जलनियोजित रह सके और गर्भावस्था में होने वाली आम समस्याएं जैसे कि कब्ज, बवासीर और मूत्राशय के संक्रमणों से बच सकें। अंतिम ​तिमाही में निर्जलीकरण से समय से पहले संकुचन शुरु हो सकते हैं।

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